इंडोनेशिया में लोकतांत्रिक सरकार सेना को अधिकार देने की दिशा में बढ़ रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत सेना अब सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस योजना के तहत देश में 500 नई बटालियनें बनाई जाएंगी, जिनका मुख्य काम सिर्फ रक्षा करना नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सामुदायिक विकास में योगदान देना भी होगा। विपक्ष ने सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे सिविल और सैन्य कार्यों में अंतर खत्म हो जाएगा।
क्या है यह नई योजना?
- बटालियनें और कृषि: इन नई बटालियनों को जमीन दी जाएगी, जहाँ वे खेती कर फसल उगाएंगे। इसका मकसद फसल उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधारना है।
- खाद्य आत्मनिर्भरता: रक्षा मंत्री शफ्री सैमसोद्दीन के अनुसार, नई बटालियनें खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत करेंगी, जिसमें फसलों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलना भी शामिल है।
- आपदा प्रबंधन: स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादी सादिकिन ने बताया कि प्रत्येक बटालियन में एक दल होगा, जिसे महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
- बढ़ता बजट: इस योजना को लागू करने के लिए सरकार ने अगले साल के लिए रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यह बढ़कर 335 ट्रिलियन रुपिया (लगभग $22 बिलियन) हो सकता है, जो इस साल के मुकाबले 37% ज़्यादा है।
सरकार और आलोचकों का क्या कहना है?
वित्त मंत्री श्री मुल्यनी इंद्रावती ने इस योजना का पूरा समर्थन किया है और इसे बजट में प्राथमिकता देने की बात कही है। उनके समर्थन से इस योजना को और भी बल मिला है।
हालांकि, कुछ आलोचकों ने इस पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे सार्वजनिक धन पर दबाव बढ़ेगा और नागरिक तथा सैन्य कार्यों के बीच की सीमा धुंधली हो जाएगी।
कुछ लोग इसे दिवंगत तानाशाह सुहार्तो के समय की याद दिलाता हुआ कदम भी मान रहे हैं, जब सेना का नागरिक जीवन में काफी प्रभाव था।
कृषि मंत्री अमरान सुलैमान ने कहा कि सैन्य अनुशासन और कड़ी निगरानी से इंडोनेशिया आयात कम कर सकेगा, निर्यात बढ़ा सकेगा, और खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल कर पाएगा।