हांगकांग: गगनचुंबी इमारतों के शहर हांगकांग में एक भयानक दुःस्वप्न साकार हो गया है। ताई पो जिले के वांग फुक कोर्ट परिसर में लगी एक भीषण आग ने कम से कम 83 लोगों की जान ले ली है, जिसने इसे लगभग सात दशकों में शहर का सबसे घातक अग्निकांड बना दिया है। यह हादसा हांगकांग की उच्च-घनत्व वाली आवासीय संरचनाओं में सुरक्षा मानकों की गंभीर जाँच की मांग कर रहा है।
नवीनतम जानकारी और हताहतों की संख्या
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मृतकों की संख्या: अधिकारियों ने शुक्रवार तड़के पुष्टि की कि कम से कम 83 लोग मारे गए हैं। यह आंकड़ा 1957 में एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग से हुई 59 मौतों की संख्या को पार कर गया है।
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लापता: दर्जनों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिसके कारण मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
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आग का फैलाव: यह आग बुधवार दोपहर को एक 32-मंजिला इमारत से शुरू हुई और तेज़ी से वांग फुक कोर्ट परिसर की छह अन्य इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।
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लगातार संघर्ष: आग लगने के 24 घंटे बाद भी, शुक्रवार सुबह तक कॉम्प्लेक्स की तीन इमारतों में आग की लपटें जारी थीं।
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बचाव कार्य: सैकड़ों दमकलकर्मियों ने आग बुझाने और इमारतों के अंदर फंसे बचे लोगों और शवों को बाहर निकालने के लिए अथक प्रयास किया।
सुरक्षा चूक पर गहन जांच
इस भयानक आग ने शहर के सुरक्षा मानदंडों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आग की तीव्रता और तेजी से फैलने के पीछे ज्वलनशील जाल (flammable netting) और फोम बोर्ड (foam boards) जैसे निर्माण सामग्री जिम्मेदार हो सकती है।
हांगकांग एक ऐसा शहर है जहाँ लाखों निवासी एक-दूसरे से सटी हुई ऊँची इमारतों में रहते हैं, जहाँ एक बड़ी आग का खतरा हमेशा बना रहता है। इस हादसे ने इस आशंका को हकीकत में बदल दिया है और हाई-राइज़ (high-rise) इमारतों में सुरक्षा मानकों की तत्काल समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भयावह पलायन और गिरफ्तारियाँ
आग की लपटों से बचने के लिए निवासियों द्वारा किए गए भयावह पलायन की कई कहानियाँ सामने आई हैं। अधिकारियों ने इस मामले में गिरफ्तारियां भी की हैं, हालांकि अभी तक उनकी संख्या और आरोपों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इस त्रासदी ने पूरे हांगकांग को झकझोर कर रख दिया है और पीढ़ियों के सबसे बड़े अग्निकांड के रूप में दर्ज हो गया है, जो शहर के भविष्य के निर्माण और सुरक्षा नियमों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है.

