थाईलैंड के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ आया जब पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा को राजशाही के अपमान से संबंधित एक गंभीर मामले में बरी कर दिया गया। यह फैसला थाईलैंड की राजनीति में उनके परिवार के प्रभाव को और मजबूत करता है, जो पिछले दो दशकों से देश की राजनीति पर हावी रहे हैं।
मामले का विवरण और फैसला
76 वर्षीय थाकसिन शिनावात्रा पर 2015 में दक्षिण कोरिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजशाही का अपमान करने का आरोप था। यह मामला थाईलैंड के सबसे कठोर कानूनों में से एक, “लेस मैजेस्टे” (Lese Majeste) के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें दोषी पाए जाने पर 3 से 15 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
शुक्रवार को बैंकॉक की आपराधिक अदालत ने इस मामले में थाकसिन को बरी कर दिया। उनके वकील विन्यात चैटमोंट्री ने इस फैसले की पुष्टि की। बाद में, बैंकॉक आपराधिक न्यायालय ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर फैसले की पुष्टि की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए गवाह और सबूत इतने कमजोर थे कि उनसे थाकसिन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किया गया साक्षात्कार अधूरा था और उसमें संदर्भ की कमी थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि थाकसिन की टिप्पणी में तत्कालीन राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया था।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि थाकसिन के खिलाफ गवाहों को राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित किया जा सकता था, क्योंकि वे उनके विरोध में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेते रहे हैं। इससे यह संभावना खुली रही कि उन्होंने थाकसिन के शब्दों की गलत व्याख्या की होगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और थाकसिन का प्रभाव
थाकसिन शिनावात्रा की यह जीत थाईलैंड के राजनीतिक प्रतिष्ठान के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2006 में एक सैन्य तख्तापलट में उन्हें पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों का सामना करना पड़ा। थाकसिन ने हमेशा दावा किया है कि उनके खिलाफ सभी मामले राजनीति से प्रेरित थे।
2023 में थाईलैंड लौटने पर, थाकसिन को भ्रष्टाचार के मामलों में आठ साल की जेल की सजा काटने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन्हें तुरंत चिकित्सा कारणों से अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। अस्पताल के एक सुइट में छह महीने बिताने के बाद, उन्हें क्षमादान और पैरोल देकर रिहा कर दिया गया। इस फैसले पर व्यापक रूप से सवाल उठाए गए कि क्या उन्हें कोई विशेष, अनुचित विशेषाधिकार दिया गया था।
थाकसिन की वापसी और उनके परिवार से जुड़ी फीयू थाई पार्टी का सत्ता में आना, व्यापक रूप से रूढ़िवादी प्रतिष्ठान के साथ एक समझौते का हिस्सा माना गया, जिसने 2006 में उन्हें सत्ता से बाहर किया था।
राजशाही कानून और इसकी कठोरता
थाईलैंड का लेस मैजेस्टे कानून (अनुच्छेद 112) दुनिया के सबसे कठोर कानूनों में से एक है। यह कानून राजा, रानी, उत्तराधिकारी या रीजेंट को “बदनाम करने, अपमान करने या धमकी देने” पर सजा का प्रावधान करता है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, 2020 के बाद से 270 से अधिक लोगों, जिनमें से कई छात्र कार्यकर्ता थे, पर इस कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
यह कानून थाईलैंड में सरकार के आलोचकों को सजा देने के लिए तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है। थाकसिन का मामला थाईलैंड के राजनीतिक संघर्ष को उजागर करता है, जहां थाकसिन की लोकप्रियता ने सेना और व्यापारिक अभिजात वर्ग के बैंकॉक प्रतिष्ठान के लिए लंबे समय से एक चुनौती पेश की है।
भविष्य की चुनौतियां और राजनीतिक अस्थिरता
हालांकि थाकसिन को इस मामले में राहत मिली है, लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट की आपराधिक खंड एक और मामले में फैसला सुनाएगा, जो उन्हें संभावित रूप से फिर से जेल भेज सकता है। यह मामला इस बात पर है कि क्या उन्होंने वास्तव में अपनी एक साल की जेल की सजा काट ली थी, जब वे थाईलैंड लौटने के बाद पुलिस अस्पताल में भर्ती थे।
वहीं, थाकसिन की बेटी और प्रधानमंत्री पेएटोंगटार्न शिनावात्रा भी कानूनी शिकंजे में हैं। उन्हें संवैधानिक न्यायालय ने एक और मामले में कथित नैतिक कदाचार के लिए कार्यालय से निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने कंबोडिया के साथ एक सीमा विवाद को संभालने में नैतिक नियमों का उल्लंघन किया। 29 अगस्त को फैसला होगा कि क्या उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया जाएगा।
थाईलैंड की राजनीति पिछले दो दशकों में राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य तख्तापलट और न्यायिक फैसलों से प्रभावित रही है। इन उतार-चढ़ावों ने देश की आर्थिक वृद्धि को भी प्रभावित किया है। मूडीज रेटिंग्स ने हाल ही में थाईलैंड के राजनीतिक ध्रुवीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार सरकार में बदलाव और कमजोर गठबंधन निवेश को रोक रहे हैं और सुधारों में बाधा डाल रहे हैं।
थाकसिन के बरी होने से थाईलैंड के राजनीतिक माहौल में तनाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन उनके परिवार और पार्टी के खिलाफ अन्य कानूनी मामलों और राजनीतिक चुनौतियों के कारण अस्थिरता बनी रह सकती है। यह फैसला थाकसिन की राजनीतिक प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है, जो अभी भी थाई राजनीति को आकार देने में लगे हुए हैं।
थाकसिन की वापसी, परिवार और भविष्य
थाकसिन शिनावात्रा का बरी होना उनके और उनके परिवार के लिए एक बड़ी जीत है। उनकी वापसी को थाई राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया है, जहां वे अपने परिवार और पार्टी की शक्ति को बनाए रखने के लिए इस निर्णय का लाभ उठा सकते हैं। बुर्नापा विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान और कानून संकाय के उप-डीन ओलारन थिनबंगतिएओ का कहना है कि थाकसिन अभी भी व्यापारिक अभिजात वर्ग का समर्थन प्राप्त करते हैं और गठबंधन पार्टियों को अपने नियंत्रण में रखते हैं।
यह मामला दिखाता है कि थाईलैंड का पारंपरिक शाही प्रतिष्ठान, जिसकी सबसे शक्तिशाली रक्षा सेना और अदालतें हैं, अभी भी उन लोगों को चुनौती दे रहा है जिन्हें वह पारंपरिक व्यवस्था के लिए खतरा मानता है। शिनावात्रा परिवार की लोकप्रियता में गिरावट भी देखने को मिली है, खासकर कंबोडिया के साथ सीमा विवाद और सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर। जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में बैंकॉक में हुए दो बड़े प्रदर्शनों ने पेएटोंगटार्न के इस्तीफे की मांग की, जिससे और अधिक विरोध प्रदर्शनों की चिंता बढ़ गई है।
थाईलैंड के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। थाकसिन के बरी होने से उनकी स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन उनके और उनकी बेटी के खिलाफ चल रहे अन्य मामले और जनता के बीच बढ़ती नाराजगी देश में राजनीतिक उथल-पुथल को जारी रख सकती है।